Bihar Politics: देश की राजधानी दिल्ली के विधानसभा चुनाव के बाद BJP यानि भारतीय जनता पार्टी 27 साल बाद सत्ता में लौटी है. इसके बाद BJP के हौसले बुलंद हो गए हैं. अब इसका सीधा असर बिहार की राजनीति पर भी देखा जा सकता है. दरअसल, दिल्ली के विधानसभा चुनाव में बिहार विधानसभा चुनाव और बिहार के ही सियासी समीकरण पर देखने को मिला है. माना जा रहा है कि इस जीत से बिहार में NDA के सहयोगियों पर दबाव बढ़ेगा.
देवली और बुराड़ी में हारे NDA के प्रत्याशी
दरअसल, बिहार में इसी साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. वहीं, दिल्ली किला फतह करने के बाद BJP बिहार के X हैंडल से बड़ा एलान कर दिया गया है. BJP बिहार की ओर से शनिवार को एक पोस्ट में लिखा गया कि दिल्ली में विपक्ष हुआ चित, अब बिहार की बारी है. ऐसे में माना जा रहा है कि BJP ने बिहार के लिए तैयारी शुरू कर दी है.
हालांकि, दिल्ली के चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल नीतीश कुमार की पार्टी JDU यानि जनता दल यूनाइटेड और चिराग पासवान की पार्टी LJPR यानि लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास को बहुत बड़ा झटका लगा है. BJP की प्रचंड लहर के बाद भी एक-एक सीट पर लड़ रहे दोनों दलों के प्रत्याशी चुनाव हार गए. देवली में LJPR और बुराड़ी में JDU प्रत्याशियों की करारी हार हुई है. ऐसे में BJP का कद NDA के भीतर और बढ़ गया है और माना जा रहा है कि BJP अन्य दलों के साथ मोल-भाव करने की स्थिति में नहीं रहेगी.
BJP की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है JDU
बता दें कि बिहार में BJP की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी JDU है. भले ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने हो, लेकिन BJP विधायकों की संख्या कहीं ज्यादा है. दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले चर्चा इस बात की थी कि NDA में सीट बंटवारा पुराने फॉर्मूले पर ही होगा. हालांकि, दिल्ली में BJP की जीत ने दबाव की रणनीति पर बढ़त बना ली है.
दूसरी और चिराग पासवान की पार्टी के नेता बिहार में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान बना चुके हैं, लेकिन दिल्ली की देवली सीट पर हार ने इस मांग पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है. इसी बीच केंद्रीय मंत्री और HAM यानि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के मुखिया जीतन राम मांझी के सुर भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं. दिल्ली और इससे पहले झारखंड चुनाव में JDU और LJPR को प्राथमिकता देने पर भड़के जीतन राम मांझी ने औकात दिखाने की बात की थी.