
ऐसा हुआ तो इसमें उत्तर प्रदेश के योगी सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. इसकी कई वजहें हैं. उत्तर प्रदेश में इसकी बेहद संपन्न परंपरा है. इस वजह से हुनर वालों की कमी नहीं है. कुछ दशक पहले तक पूरब के मैनचेस्टर के रूप में विख्यात कानपुर उत्तर प्रदेश में ही है. वाराणसी और मुबारकपुर अपनी रेशमी साड़ियों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. भदोही और मीरजापुर के कालीन की भी यही शोहरत है. गौतमबुद्ध नगर रेडिमेड गारमेंट का नया हब बनकर उभरा है. लखनऊ के चिकन के कपड़ों की देश और दुनिया दीवानी है.
योगी सरकार ने इस परंपरागत उद्योगों को बढ़ाने, इनके हुनर को निखारने के लिए कई योजनाएं चला रखी है. कुछ तो जिलों के (ओडी ओपी) में भी शामिल हैं. इसके तहत गोरखपुर और कुछ अन्य जिलों ने फ्लैटेड फैक्टरी बनी हैं . गौतम बुद्ध नगर में, लखनऊ, मीरजापुर और भदोही में साल 2025 में ओडीओपी (ODOP) योजना के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) स्थापित करने का लक्ष्य है. इससे एक ही छत के नीचे संबंधित जिले के ODOP उत्पादों को सारी सुविधाएं मिलेंगी.
वस्त्र उद्योग क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनाएं
लोक कल्याण संकल्प पत्र 2022 में भी भाजपा ने सत्ता में आने पर आगामी 5 वर्षों में उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बना कर 5 लाख रोजगार या स्व-रोजगार के अवसर प्रदान करने का वायदा किया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि प्रदेश में वस्त्र उद्योग क्षेत्र में रोजगार सृजन हेतु व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं.